रामचंद्र के नाम से इनको बस सत्ता हथियाना था
मंदिर नहीं बनाना था इन्हें मंदिर नहीं बनाना था
झूठे वादे झूठी बातें झूठी कसमें झूठे नारे
सत्ता को हथियाने के केवल हथकंडे थे सारे
इनको तो बस हिंदू जन को झूठा ख़्वाब दिखाना था
मंदिर नहीं
कभी बहाना बहुमत का कभी गठबंधन की मजबूरी
रामभक्ति नाम लिया और पोई सत्ता की पूरी
कभी कोर्ट कभी संविधान कभी विपक्ष निशाना था
मंदिर नहीं...
हिंदू जन की पीड़ा का बस इस्तेमाल किया इसने
मंदिर के निर्माण का नाटक बस बिकराल किया इसने
रैली सभायें नारे वादे बस हिंदू को भरमाना था
मंदिर....
हिंदू जन की पीड़ा से तुम तृणभर भी अनजान नही
मंदिर से गद्दारी के फल का तुमको अनुमान नही
अवसर रोज नही मिलता है इनको यही बताना था
मंदिर नहीं...
------अवनीश द्विवेदी
मंदिर नहीं बनाना था इन्हें मंदिर नहीं बनाना था
झूठे वादे झूठी बातें झूठी कसमें झूठे नारे
सत्ता को हथियाने के केवल हथकंडे थे सारे
इनको तो बस हिंदू जन को झूठा ख़्वाब दिखाना था
मंदिर नहीं
कभी बहाना बहुमत का कभी गठबंधन की मजबूरी
रामभक्ति नाम लिया और पोई सत्ता की पूरी
कभी कोर्ट कभी संविधान कभी विपक्ष निशाना था
मंदिर नहीं...
हिंदू जन की पीड़ा का बस इस्तेमाल किया इसने
मंदिर के निर्माण का नाटक बस बिकराल किया इसने
रैली सभायें नारे वादे बस हिंदू को भरमाना था
मंदिर....
हिंदू जन की पीड़ा से तुम तृणभर भी अनजान नही
मंदिर से गद्दारी के फल का तुमको अनुमान नही
अवसर रोज नही मिलता है इनको यही बताना था
मंदिर नहीं...
------अवनीश द्विवेदी
