Showing posts with label कविता. Show all posts
Showing posts with label कविता. Show all posts

Tuesday, May 14, 2019

असमंजस

असमंजस 

तुझे न देखू तो क्या देखू
तुझे देखलूं ,  तो क्या देखूं|
तू साथ न हो तो, बारात क्या हो
तू साथ हो, तो बारात क्या हो |
तू न हो तो सबसे क्या
तू हो तो सबसे क्या |
तू पास न हो तो क्या मेला
तू पास हो गर तो क्या मेला|
तुझे न सोचूं तो क्या सोचूं
तुझे सोचूं तो क्या सोचूं|

                  -अवनीश द्विवेदी 


Wednesday, January 2, 2019

इन्हे मंदिर नहीं बनाना था

रामचंद्र के नाम से इनको बस सत्ता हथियाना था
मंदिर नहीं बनाना था इन्हें मंदिर नहीं बनाना था
झूठे वादे झूठी बातें झूठी कसमें झूठे नारे
सत्ता को हथियाने के केवल हथकंडे थे सारे
इनको तो बस हिंदू जन को झूठा ख़्वाब दिखाना था
मंदिर नहीं
कभी बहाना बहुमत का कभी गठबंधन की मजबूरी
रामभक्ति नाम लिया और पोई सत्ता की पूरी
कभी कोर्ट कभी संविधान कभी विपक्ष निशाना था
मंदिर नहीं...
हिंदू जन की पीड़ा का बस इस्तेमाल किया इसने
मंदिर के निर्माण का नाटक बस बिकराल किया इसने
रैली सभायें नारे वादे बस हिंदू को भरमाना था
मंदिर....
हिंदू जन की पीड़ा से तुम तृणभर  भी अनजान नही
मंदिर से गद्दारी के फल का तुमको अनुमान नही
अवसर रोज नही मिलता है इनको यही बताना था
मंदिर नहीं... 
                        ------अवनीश द्विवेदी

Insurance is not investment

  Insurance is not investment. Insurance and investments are two different financial instruments that serve different purposes. Insurance ...